रोश्या गवत क्या है? अस्तंबा यात्रा में सुगंधित घास का महत्व, परफ्यूमरी और औषधीय उपयोग | जय आदिवासी

नमस्कार मेरे शहादा, तलोदा और नंदुरबार के आदिवासी भाई-बहनों!
जब धनतेरस की हवा चलती है तो हमारे घरों में एक मीठी-मीठी खुशबू फैलने लगती है। वो खुशबू रोश्या गवत की होती है।
ये कोई मामूली घास नहीं है। ये सतपुड़ा की पहाड़ियों की सुगंधित घास है, जिसका वैज्ञानिक नाम Cymbopogon martinii (रोहिश या पाल्मरोसा घास) है। हमारे बुजुर्ग इसे “अस्तंबा बाबा की घास” कहते हैं।
आज मैं आपको इस गवत की पूरी सच्ची कहानी बताता हूँ — उसकी खुशबू, परफ्यूमरी, इंडस्ट्री, दवाई और सबसे महत्वपूर्ण — अस्तंबा ऋषी यात्रा में इसका पवित्र महत्व।
रोश्या गवत असल में क्या है?
रोश्या गवत सतपुड़ा की ऊँची पहाड़ियों, खासकर अस्तंबा शिखर के आसपास उगने वाली एक खास घास है। ये हरी-भरी, लंबी पत्तियों वाली और बहुत मजबूत सुगंध वाली होती है।

जब आप इसे हाथ में रगड़ते हो तो पूरा हाथ महक उठता है। यही वजह है कि इसे सुगंधित घास कहा जाता है। नंदुरबार, धुळे और जलगांव जिलों में ये प्राकृतिक रूप से बहुतायत में मिलती है।
अस्तंबा ऋषी यात्रा में रोश्या गवत का पवित्र महत्व

अस्तंबा शिखर पर पहुँचते ही सबसे पहला काम होता है — रोश्या गवत चढ़ाना।
हम हजारों भाई मशाल जलाकर, ढोल की थाप पर चढ़ते हैं और अपने साथ इस सुगन्धि घास का बंडल लेकर जाते हैं। शिखर पर पहुंचकर हम:
- रोश्या गवत अस्तंबा बाबा के स्थान पर चढ़ाते हैं
- नवस पूरा करते हैं
- थोड़ी घास घर के लिए वापस ले आते हैं
हमारे बुजुर्ग मानते हैं कि इस घास में अस्तंबा ऋषी का प्रत्यक्ष आशीर्वाद होता है। घर लाकर देवघर में रखने से परिवार में सुख-शांति, फसल अच्छी और नजर-बदर से रक्षा होती है।
रोश्या गवत की खुशबू और परफ्यूमरी-इंडस्ट्री में उपयोग
इस सुगन्धि घास की खुशबू इतनी अनोखी है कि आज पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल परफ्यूमरी में होता है।

- इससे पाल्मरोसा ऑयल (Essential Oil) निकाला जाता है
- ये ऑयल महंगे परफ्यूम, साबुन, बॉडी लोशन, अगरबत्ती और सौंदर्य प्रसाधनों में इस्तेमाल होता है
- खुशबू फूल जैसी मीठी और लंबे समय तक टिकने वाली होती है
- नंदुरबार-धुळे के कई आदिवासी परिवार इस घास से ऑयल निकालकर अतिरिक्त कमाई भी करते हैं
रोश्या गवत के औषधीय गुण
आयुर्वेद में इस सुगन्धि गवत को शक्तिशाली औषधि माना जाता है। इसके मुख्य फायदे हैं:
- शरीर को ठंडक देता है
- जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत
- खांसी, जुकाम और सांस की समस्या में फायदा
- त्वचा के रोग, घाव और खुजली में उपयोग
- पेट की गड़बड़ी और कृमि नाशक
- तनाव कम करता है और मन को शांत रखता है
आदिवासी भाई कैसे तैयारी करते हैं?

धनतेरस से 1-2 महीने पहले पुरुष भाई अस्तंबा की तैयारी शुरू कर देते हैं:
- जंगल में घूमकर सबसे अच्छी, हरी और सुगंधित घास चुनते हैं
- इसे सुखाकर या ताजा रखकर बंडल बनाते हैं
- घर में पूजा करके नवस लेते हैं
यात्रा के दौरान घास सूख न जाए, इसलिए इसे कपड़े या पत्तों में लपेटकर रखते हैं।
घर लाकर क्या करें?
- थोड़ी रोश्या गवत देवघर या पूजा स्थान पर रखें
- कुछ हिस्सा खेत में बो दें
- परिवार के हर सदस्य को थोड़ी-थोड़ी घास आशीर्वाद के रूप में दें
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. रोश्या इस सुगन्धि घास का वैज्ञानिक नाम क्या है? इस गवत का वैज्ञानिक नाम Cymbopogon martinii है, जिसे पाल्मरोसा घास या रोहिश भी कहते हैं।
2. क्या रोश्या सुगन्धि घास सिर्फ अस्तंबा यात्रा में ही मिलती है? नहीं। ये सतपुड़ा की कई पहाड़ियों पर उगती है, लेकिन अस्तंबा शिखर वाली घास को सबसे पवित्र माना जाता है।
3. रोश्या गवत से परफ्यूम बनता है? हाँ, इससे पाल्मरोसा एसेंशियल ऑयल निकाला जाता है, जो दुनिया भर के परफ्यूम और सौंदर्य उत्पादों में इस्तेमाल होता है।
4. रोश्या गवत के औषधीय फायदे क्या हैं? ये जोड़ों के दर्द, खांसी, त्वचा की समस्या, पेट की गड़बड़ी और तनाव कम करने में मदद करती है।
5. स्त्रियाँ इस गवत का उपयोग कैसे कर सकती हैं? स्त्रियाँ यात्रा नहीं जातीं, लेकिन पुरुष जब घर लाते हैं तो वे देवघर में रखकर पूजा करती हैं और परिवार को आशीर्वाद देती हैं।
6. इस सुगन्धि घास को घर में कितने समय तक रख सकते हैं? सही तरीके से सुखाकर रखें तो 1 साल तक आसानी से रखी जा सकती है।
7. क्या रोश्या गवत खेत में उगा सकते हैं? हाँ, कई भाई अपने खेत में या घर के आसपास सफलतापूर्वक उगाते हैं।
8. रोश्या गवत चढ़ाने का सबसे अच्छा समय क्या है? अस्तंबा शिखर पर दिवाली के आसपास, खासकर मुख्य यात्रा के दिनों में।
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- रोश्या गवत के 10 महत्वपूर्ण फायदे – PDF
- अस्तंबा यात्रा रोश्या गवत तैयारी चेकलिस्ट (Printable)
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शहादा के भाइयों, अस्तंबा ऋषी महाराज का आशीर्वाद सब पर बना रहे!
अस्तंबा ऋषी महाराज की जय! जय आदिवासी! जय सतपुड़ा! ⛰️🚩
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