मौलीपाड़ा / लेकुरवाडी – उकाई बैक वाटर के किनारे छुपा हुआ एक शांत, अनछुआ प्राकृतिक खज़ाना

मौलीपाड़ा / लेकुरवाडी – उकाई बैक वाटर के किनारे छुपा हुआ एक शांत, अनछुआ प्राकृतिक खज़ाना

मौलीपाड़ा की जलभरी भूमि और बीच से गुजरती सड़क का ड्रोन दृश्य – टापी नदी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता
मौलीपाड़ा का ड्रोन से लिया गया शानदार दृश्य — पानी के बीच से गुजरती सुंदर सड़क।

अगर कभी मन हुआ हो कि शहर की भीड़ से दूर जाया जाए, बिना प्लानिंग के कहीं निकल पड़ा जाए, और रास्ते में बस पेड़ों की छाया, छोटी पहाड़ियाँ और नदी की हवा आपका साथ निभाए — तो मौलीपाड़ा (या स्थानीय लोग जिसे लेकुरवाडी भी कहते हैं) ऐसी ही जगह है। नंदुरबार जिले के अंदर बसी यह छोटी-सी बस्ती आज भी उतनी ही सरल, शांत और प्राकृतिक है, जैसी कई जगहें पहले हुआ करती थीं।

इसकी असली पहचान है उकाई बैक वाटर का किनारा, आसपास बिखरी हरी पहाड़ियाँ, खुली हवा और जनसमूह से दूर एकदम रॉ नेचर। अगर आप बाइक से घूमना पसंद करते हैं, नेचर की लो-key जगहों का शौक रखते हैं, या गांवों की असल जिंदगी को नज़दीक से महसूस करना चाहते हैं — मौलीपाड़ा आपको निराश नहीं करेगी।


मौलीपाड़ा कहाँ है? और यहाँ कैसे पहुँचा जाए?

मौलीपाड़ा महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में स्थित है, और गुजरात की सीमा से बिल्कुल नज़दीक आता है। इस जगह तक पहुँचना उतना मुश्किल नहीं जितना पहली नज़र में लगता है।

1. नंदुरबार से दूरी

मौलीपाड़ा, नंदुरबार शहर से लगभग 44–50 किमी के बीच पड़ता है। रास्ता साधारण है, गाँवों से होकर जाता है और हल्की-फुल्की टेढ़ी सड़कों से गुजरता है।

2. शहादा से दूरी

अगर आप शहादा की तरफ से जा रहे हैं तो लगभग 70–80 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। शहादा – नवापूर रोड पर चलते हुए यह सफर आसान और एकदम scenic लगता है।

3. गुजरात से पहुँचने वाले यात्रियों के लिए

क्योंकि यह क्षेत्र गुजरात बॉर्डर से बिल्कुल पास है:

  • उच्छल / सोनगढ़ से आना आसान है

  • सूरत से दूरी लगभग 110–120 किमी के आसपास मानी जा सकती है

  • कई लोग निज़ार और उच्छल रूट को भी अपनाते हैं क्योंकि इन रूटों पर ट्रैफिक कम मिलता है और रास्ता भी काफी सुंदर है

4. नज़दीकी रेलवे स्टेशन

सबसे नज़दीक स्टेशन नवापूर रेलवे स्टेशन है। नवापूर से मौलीपाड़ा की दूरी कम है और लोकल वाहन आराम से मिल जाते हैं।

5. बाइक से जाने का मज़ा — अलग ही लेवल का

अगर आप बाइक राइडर हैं, तो यह जगह आपके लिए एकदम परफेक्ट है।
रास्ता पहाड़ी, जंगल, नदी — सबका मिश्रण देता है।
कई मोड़ ऐसे हैं जहाँ रुककर फोटो लेने का मन अपने-आप कर जाता है।


मौलीपाड़ा क्यों खास है? यहाँ क्या देखने को मिलता है?

बहुत सी जगहें खूबसूरत होती हैं, लेकिन मौलीपाड़ा की खूबसूरती अनकही और अनछुई है।

मौलीपाड़ा क्षेत्र में बरसाती पानी से भरे खेत और हरियाली का ड्रोन दृश्य
मौलीपाड़ा के पास बरसात के बाद पानी से भरे खेतों का सुंदर ड्रोन दृश्य।

1. नदी का शांत किनारा — एकदम raw beauty

उकाई बैक वाटर इस क्षेत्र की साँसें है।
सुबह-सुबह नदी के ऊपर हल्का धुंध बैठना, पानी का फ्लो धीमा-तेज़ होना, किनारे के पेड़ों की परछाई — पूरा माहौल आपको कुछ देर चुप रहने पर मजबूर कर देता है।

यहाँ भीड़ नहीं मिलती।
बिल्कुल खाली-सा किनारा, जहाँ आप अपने हिसाब से समय बिता सकते हैं — चाहे चुपचाप बैठना हो, चाहे फोटोग्राफी करनी हो।

2. आसपास की पहाड़ियों का सौंदर्य

यह इलाका हल्की पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
बारिश में यहाँ की greenery अपने चरम पर होती है।
नवंबर-फरवरी तक भी जगह ठंडी और बहुत सुखद रहती है।

3. ग्राम-संस्कृति की खुशबू

मौलीपाड़ा आदिवासी संस्कृति से जुड़ा हुआ इलाका है।
यहाँ जीवन बेहद सरल है —

  • बच्चे नदी किनारे खेलते मिल जाते हैं

  • महिलाएँ परंपरागत तरीके से खेतों का काम करती दिखती हैं

  • लोग सहज, विनम्र और अतिथि-भाव से भरपूर मिलते हैं

यदि आप Tribal Culture को नज़दीक से समझना चाहते हैं, यह जगह बहुत कुछ सिखा जाती है।

4. शोर-गुल से दूर शांति

सबसे बड़ी बात — यहाँ commercial tourism नहीं है।
इसका मतलब:

  • ना भीड़

  • ना गाड़ी-भिड़ंत

  • ना शोर

  • ना कचरा

बस हवा, पेड़, नदी, और गांव की शांत दिनचर्या।


यहाँ क्या-क्या कर सकते हैं? (Activities & Experiences)

1. Sunrise और Sunset देखना

नदी पर उगता और ढलता सूरज इस जगह का सबसे खूबसूरत हिस्सा है।
सूरज की किरणें पानी पर पड़ती हैं और पूरा किनारा सुनहरा रंग ले लेता है।

2. Drone Photography / Videography

अगर आप content creator हो, जैसे मैंने अपने चैनल TickuTalk1 पर videos डाले हैं —
तो यहाँ आपको drone के लिए perfect shots मिलेंगे:

  • नदी का wide panoramic view

  • पहाड़ियाँ

  • छोटे-छोटे खेत

  • raw tribal lifestyle
    ये visuals किसी भी vlog को cinematic look दे देते हैं।

मौलीपाड़ा के पास पानी के बीच संकरे रास्ते पर बाइक राइड का POV दृश्य
उकाई बैकवॉटर के बीच से गुजरता बाइक राइड का शानदार POV शॉट।

3. Light Trek / Walk

कोई बड़ा कठोर ट्रेक नहीं है।
लेकिन नदी से थोड़ी दूरी पर गाँव की तरफ जाती पगडंडियाँ प्राकृतिक सुंदरता से भरी हुई हैं।

4. Picnic-Style Time Spend

अगर परिवार या दोस्तों के साथ जा रहे हैं, तो नदी किनारे बैठकर चाय-नाश्ता करना भी यादगार अनुभव बन जाता है।

5. Tribal Culture को Observe करना

यहाँ आप पारंपरिक घरों, देसी crop cultivation और लोकल lifestyle को शांतिपूर्वक देख सकते हैं।


कब जाएँ? (Best Time to Visit)

  • बारिश (जुलाई – सितंबर):
    जगह सबसे खूबसूरत दिखती है लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से सावधानी रखनी पड़ती है।

  • सर्दी (अक्टूबर – फरवरी):
    घूमने का सबसे बेहतरीन समय।
    साफ मौसम, सुहानी हवा, और बेहतरीन visuals।

  • गर्मी (मार्च – जून):
    दोपहर में गर्मी पड़ती है, लेकिन सुबह-शाम का समय शानदार होता है।


कुछ जरूरी बातें (Travel Tips)

  • नदी के बहुत किनारे जाने से बचें, खासकर बरसात के बाद

  • गांव में सम्मान और सरलता से व्यवहार करें

  • कचरा बिल्कुल न छोड़ें

  • Offline maps साथ रखें — कुछ हिस्सों में नेटवर्क कमजोर होता है

  • हल्का समान, पानी और basic snacks रखना अच्छा विकल्प है


निष्कर्ष – क्यों मौलीपाड़ा आपकी अगली ट्रिप होनी चाहिए?

क्योंकि यह जगह tourist-spot की तरह नहीं है…
यह जगह एक अनुभव है।

यहाँ आप नेचर को असली रूप में देखते हो —
बिना filter, बिना crowd, बिना commercial setup।

मौलीपाड़ा आपको वो एहसास देता है जो बड़े शहर कभी नहीं दे पाते:
शांति, अपनापन, और प्यार भरा प्राकृतिक माहौल।

अगर आपको गांवों की simplicity, नदी किनारे की freshness, और raw landscapes पसंद है —
तो यह जगह एक बार जरूर देखने लायक है।

मौलीपाड़ा / लेकुरवाडी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. मौलीपाड़ा कहाँ स्थित है?

मौलीपाड़ा महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले की नवापूर तहसील में स्थित एक छोटा, बेहद शांत गाँव है। यह महाराष्ट्र–गुजरात सीमा से भी काफी नज़दीक है।

2. मौलीपाड़ा का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन कौन-सा है?

मौलीपाड़ा के सबसे पास नवापूर रेलवे स्टेशन पड़ता है। यहाँ से गांव तक स्थानीय वाहन आसानी से मिल जाते हैं।

3. नंदुरबार से मौलीपाड़ा की दूरी कितनी है?

लगभग 44–50 किमी, रास्ता गांवों और हल्की पहाड़ियों से होकर गुजरता है।

4. शहादा से मौलीपाड़ा कैसे जाएँ?

शहादा से दूरी लगभग 70–80 किमी है। शहादा–नवापूर रूट सबसे आसान और scenic माना जाता है।

5. यहाँ क्या-क्या देखने लायक है?

मुख्य आकर्षण हैं:

  • टापी नदी का शांत किनारा

  • हरी पहाड़ियाँ

  • स्थानीय आदिवासी संस्कृति

  • Raw nature, drone shots के लिए perfect visuals

6. क्या मौलीपाड़ा परिवार के साथ घूमने के लिए सुरक्षित है?

हाँ, यह जगह पूरी तरह शांत और सुरक्षित है। बस नदी किनारे सावधानी रखें और गांव की संस्कृति का सम्मान करें।

7. मौलीपाड़ा घूमने का सबसे अच्छा मौसम कौन-सा होता है?

अक्टूबर से फरवरी तक का समय सबसे बेहतरीन होता है। मौसम ठंडा, साफ और बेहद सुहावना रहता है।

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